कविता को 2014 के चुनाव में 1.67 लाख वोटों से जीती थीं. निजामाबाद तब सुर्खियों में आया था जब 177 किसान चुनावी मैदान में उतरे थे.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर एक बार फिर लोकसभा पहुंच गये हैं. उन्होंने तिरूवनंतपुरम सीट से चुनाव जीता है. इस सीट पर शशि थरूर से चुनाव लड़ने के लिए मार्च में मिजोरम के राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा देकर कुम्मनम राजशेखरन उतरे थे.
66 वर्षीय राजशेखरन ने 1970 के दशक में आरएसएस के कार्यकर्ता के तौर अपना सफर शुरू किया था और दिसंबर 2015 से मई 2018 तक वह बीजेपी की केरल इकाई के अध्यक्ष रहे और फिर मिजोरम के राज्यपाल बनाए गए थे. थरूर ने उन्हें एक लाख वोटों के अंतर से हराया. वो इस निर्वाचन क्षेत्र से तीसरी बार जीते हैं.
अपनी जीत और बीजेपी की जीत के बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट भी किया.
इस सीट पर बीजेपी के रवि किशन और सपा-बसपा-रालोद उम्मीदवार रामभुआल निषाद के बीच मुक़ाबला था जबकि कांग्रेस के मधुसूदन तिवारी मुक़ाबले को त्रिकोणीय बना रहे थे. हालांकि नतीजों में रवि किशन को 3 लाख से भी अधिक वोटों से जीत मिली जबकि गठबंधन के सपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे.
2014 में इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण प्रताप सिंह महज 42 हज़ार वोटों से जीते लेकिन 2018 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने ये सीट गंवा दी थी और सपा-बसपा और निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी प्रवीण निषाद विजयी हुए थे.
हालांकि इस चुनाव से पहले निषाद पार्टी ने बीजेपी का दामन थाम लिया था जिससे रवि किशन की राह आसान हो गई मानी जा रही थी. इस बार यहां से कांग्रेस प्रत्याशी मधुसूदन तिवारी का जमानत जब्त हो गया है.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 2014 में दो सीटें जीती थीं लेकिन इस बार वहां उसे 18 सीटों पर जीत मिली है. चुनाव के दौरान बंगाल की जिस सबसे चर्चित सीट पर सबकी नज़र टिकी हुई थी वो है आसनसोल.
यहां से बीजेपी के केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल कांग्रेस की मुनमुन सेन को 1 लाख 97 हज़ार से अधिक वोटों से हराया है.
बीजेपी के केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर से चुनाव हार गये हैं. 2014 में इस सीट से मनोज सिन्हा ने समाजवादी पार्टी के शिवकन्या कुशवाहा को क़रीब 32 हज़ार वोटों से हराया था. इस बार मनोज सिन्हा गठबंधन के अफजाल अंसारी से 1.19 लाख वोटों से हार गये हैं.
मुंबई उत्तर पश्चिम सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता संजय निरूपम चुनाव हार गए हैं. शिवसेना के गजानन कीर्तिकर ने निरूपम को 2 लाख 51 हजार वोटों से हराया. फ़िल्म से राजनीति का सफ़र तय करने वाले सुनील दत्त की वजह से मुंबई उत्तर सीट मशहूर रही है. सुनील दत्त यहां से 18 साल सांसद रहे.
1967 से 1977 तक ये सीट कांग्रेस के पास रही और उसके बाद जानेमाने वकील राम जेठमलानी पहले जनता पार्टी बाद में बीजेपी के सांसद बने. फिर 1984 से 1996 तक कांग्रेस के सांसद और फिल्म अभिनेता सुनील दत्त का दौर रहा.
2005 में सुनील दत्त की मौत के बाद हुए उपचुनाव में उनकी बेटी प्रिया दत्त सांसद चुनी गई थीं. 2009 में भी ये सीट कांग्रेस के पास रही लेकिन फिर 2014 में शिवसेना के गजानन कीर्तिकर ने इस सीट को जीत लिया.
2014 में बीजेपी के टिकट पर 2.65 लाख वोटों से जीते शत्रुघ्न सिन्हा इस बार यहां से 2.84 लाख वोटों से हार गये.
गांधी मैदान पटना साहिब की एक बड़ी पहचान है जहां कई बड़े नेताओं ने रैलियां की हैं. कभी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, राम मनोहर लोहिया और अटल बिहारी वाजपेयी भी रैलियां कर चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां रैली की है. जयप्रकाश नारायण ने 1974 में इसी मैदान से संपूर्ण क्रांति की बात कही थी.
परिसीमन के बाद 2009 में पहली बार यहां लोकसभा चुनाव हुए जिसमें बीजेपी के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा की जीत हुई. 2014 में वे फिर से यहीं से सांसद बने. कायस्थ बहुल इस सीट पर इस बार बीजेपी ने उनका टिकट काटकर केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद को दे दिया था.
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली सीट से दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडेय के बीच मुक़ाबला था जिसे मनोज तिवारी ने 3,66,102 वोटों से अंतर से जीत लिया है.
तिवारी को 7,87,799 (53.9 फ़ीसदी) वोट, जबकि दीक्षित को 4,21,697 (28.85 फ़ीसदी) वोट मिले.
वहीं आम आदमी पार्टी (आप) के दिलीप पांडेय 1,90,856 (13.06 फ़ीसदी) वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. 2014 में भी मनोज तिवारी इसी सीट से संसद पहुंचे थे.
माना तो यहां तक जा रहा है कि इस सीट के नतीजे दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी का भविष्य तय करेगी क्योंकि 2020 में यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
बीजेपी की जिस दूसरी महिला नेता की सबसे ज़्यादा चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा रही वो हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर. साध्वी ने भोपाल सीट से संसद का रुख किया है.
उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को 3,64,822 वोटों से हराया. इस सीट से जीत कर कांग्रेस के शंकरदयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति), बीजेपी की उमा भारती, सुशील चंद्र वर्मा और कैलाश जोशी कभी संसद पहुंचे थे.
बीजेपी प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर इस चुनाव के दौरान बहुत विवादों में रही हैं. उन्हें मालेगांव बम ब्लास्ट मामले के एक अभियुक्त के तौर पर जाना जाता है.
साध्वी प्रज्ञा ने पत्रकारों से बात करते हुए दिग्विजय सिंह को देश का दुश्मन बताया. उन्होंने कहा, "मैं देश के दुश्मनों के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए तैयार हूं." इसके अलावा भी उन्होंने कई ऐसे बयान दिये जिस पर बहुत विवाद हुआ. इसमें से एक था "नाथूराम गोडसे को देशभक्त" बताना.
इस बार के लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्तर लोकसभा सीट सबसे चर्चित सीटों में से एक रही है क्योंकि कांग्रेस ने यहां से बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को उम्मीदवार बनाया है. लेकिन कांग्रेस का यह दांव सफल नहीं हो सका और उर्मिला 4.65 लाख वोटों से हार गईं.
यहां से बीजेपी के प्रत्याशी गोपाल शेट्टी ने एक बार फिर जीत हासिल की है. यह सीट 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999 में भी बीजेपी के खाते में गई थी. जबकि 2004 कांग्रेस के टिकट पर गोविंदा यहां से जीते थे तो 2009 में कांग्रेस के संजय निरुपम.